Tuesday, February 27, 2024
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बच्चों के नाम वृक्ष लगाओ,दिल्ली से प्रदूषण भगाओ

निगम पार्षद धर्मवीर सिंह ने तैयार की अनूठी योजना–अपने जन्मदिन पर पुस्तैनी गांव का मनाते हैं स्थापना दिवसपर्यावरण को तरो-ताजा रखने के लिए अगर हर एक इंसान कम से कम एक पेड़ लगाए तो इस धरती पर प्रदूषण नाम की चीज नहीं रहेगी और इंसान तो क्या जानवर भी स्वच्छ वातावरण में सांस ले सकेंगे। कुछ ऐसा ही काम वार्ड नंबर 193 (श्रीनिवासपुरी) से निगम पार्षद धर्मवीर सिंह ने दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) के जरिए शुरु किया। अगर इस काम को दिल्ली वाले अंगीकृत करें तो निश्चित तौर पर दिल्ली की आबो-हवा से प्रदूषण बिल्कुल खत्म हो जाएगा। जी हां,धर्मवीर को वर्ष 2009 में जब दिल्ली गार्डेन कमेटी का चेयरमैन बनाया गया तो उन्होंने अपनी अर्से की ख्वाहिश को कार्यरुप दिया। उन्होंने सरदार पटेल वृक्ष योजना के तहत हर बच्चे के नाम पर एक पेड़ लगाने की योजना शुरु की। उनका कहना है कि अगर कोई परिवार अपने बच्चे के नाम पर पार्कों में पेड़ लगाता है तो उस बच्चे का भी पेड़ से भावनात्मक लगाव हो जाता है।

जाहिर सी बात है वह बच्चा भी अपने नाम पर लगे पेड़ की देखभाल दिल से करेगा। इस तरह दिल्ली में फैलते प्रदूषण को खत्म करने के साथ-साथ दिल्ली में हरियाली लाई जा सकती है। क्योंकि दिल्ली भर में सिर्फ एमसीडी के करीब 15 हजार पार्क हैं। दिल्ली के गुर्जर समुदाय से ताल्लुक रखने वाले धर्मवीर अपना कभी जन्मदिन तो नहीं मनाते लेकिन अपने पूर्वजों के बसाए गांव कालका गढ़ी का स्थापना दिवस 7 मई को ही जन्मदिन समझकर बुजुर्गों की यादों को ताजा रखते हैं। वह बताते हैं कि उनके पूर्वज चौधरी गुलाब सिंह गुर्जर ने वर्ष 1742 में ईस्ट ऑफ कैलाश के पास कालका गढ़ी गांव को बसाया था। निगम पार्षद धर्मवीर का कहना है कि हालांकि श्रीनिवासपुरी क्षेत्र का पार्षद होने की वजह से इस क्षेत्र में विकास कराना उनकी प्राथमिकता है,लेकिन वह दिल्ली के अन्य जगहों पर भी विकास कार्य कराने में बढ़-चढ़कर रुचि रखते हैं। वह कहते हैं कि वर्ष 2007 से अब तक उन्हें करीब 4 करोड़ रुपये का फंड एमसीडी से मिल चुका है। इस रकम को उन्होंने विकास कार्यों में खर्च कर क्षेत्र के विकास का प्रयास किया है। इसके साथ ही उनके प्रयास से क्षेत्र के सभी स्कूलों की इमारत तकरीबन पक्की हो गई है।

न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी के डी ब्लॉक में 500 गाड़ियों के लिए पार्किंग स्थल आगामी दिसम्बर तक तैयार हो जाएगा। इसके साथ ही क्षेत्र में 7 अर्नामेंटल गेट बनवाए हैं। इन गेटों का नामकरण चन्द्रशेखर आजाद,वीर अब्दुल हमीद जैसे शहीदों के नाम पर किया गया है। ताकि शहीदों की यादें ताजा रह सकें। पार्षद धर्मवीर अपने जीवन का सबसे सुखद पल के बारे में बताते हैं कि उन्होंने जिस प्राइमरी स्कूल के टीन शेड के नीचे शिक्षा ग्रहण किया था,जब वह निगम पार्षद बनें तो वह स्कूल तब भी वैसा था। उन्होंने अपने प्रयास से स्कूल की बिल्डिंग को जब पक्का कराया तो उन्हें अपार आनंद की अनूभूति हुई। निगम पार्षद धर्मवीर सिंह दिल्ली विश्वविद्यालय से वर्ष 1986 में वाणिज्य स्नातक की डिग्री हासिल कर लखनऊ विश्वविद्यालय से विधि स्नातक की डिग्री पाने के साथ-साथ राजनीति में भी कॉलेज जीवन से ही सक्रिय हो गए थे।

जनसंघ की पृष्ठभूमि से ताल्लुक रखने की वजह से वर्ष 1987 में तक भाजपा मण्डल अध्यक्ष रहें और फिर इसी दौरान निगम पार्षद बनें तो राजनीति के धुरंधर खिलाड़ी हो गए।उसके बाद से लेकर अबतक बखूबी अपना काम करते हुए इन्होंने भाजपा में अखिल भारतीय स्तर की जिम्मेदारी निभायी हालांकि कई वर्षों से भाजपा खेमें में सांसद के टिकट पर चुनाव लड़ने की सुगबुगाहट होती रही है। बावजूद इसके धर्मवीर अपने कामों को ज्यादा प्रश्रय देते हैं। फिलहाल,धर्मवीर के परिवार में पत्नी सुरेश सिंह और दो बेटियां व एक बेटा है। बड़ी बेटी नेहा सिंह सीए और छोटी बेटी अवंतिका दसवीं क्लास की स्टूडेंट है,जबकि बेटा मानवेंदर सिंह इंजीनियरिंग का छात्र है।

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