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UP के 762 शहरी निकायों में जल्द बजेगी चुनाव की डुगडुगी, इसी माह जारी हो सकता है वार्डों का आरक्षण

लखनऊ: उत्तर प्रदेश के नगर निकायों में अब जल्द चुनाव की प्रक्रिया शुरू होने की उम्मीद की जाने लगी है। पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षण का प्रतिशत तय करने के लिए बने समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग की रिपोर्ट के बाद इस महीने के अंत तक शहरी निकायों की सीटों का अनंतिम आरक्षण तय किया जा सकता है। यह प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट को रिपोर्ट की जानकारी देने और चुनाव की अनुमति मांगने के बाद शुरू होगी। उम्मीद जताई जा रही है कि यह प्रक्रिया सरकार अगले सप्ताह पूरी कर लेगी। वहीं, राज्य निर्वाचन आयोग शुक्रवार 10 मार्च से मतदाता सूची का पुनरीक्षण शुरू कर देगा और एक अप्रैल को अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन हो जाएगा।

साल 1995 के बाद हुए सभी शहरी निकायों चुनावों में अनारक्षित सीटों पर ओबीसी उम्मीदवार के जीतने की स्थिति के आधार पर आयोग ने पिछड़ा वर्ग की राजनीतिक स्थिति का परीक्षण किया है। साथ ही तमाम खामियों की तरफ भी इशारा किया है, जिसमें आरक्षण नियमों का सही पालन न किया जाना भी शामिल है। आयोग ने बिंदुवार गिनाई गईं खामियों को दूर करने की भी सिफारिश की है। इसके बाद माना जा रहा है कि कई सीटों के सियासी समीकरण बदलेंगे। जिन सीटों को लंबे समय तक एक ही वर्ग के लिए आरक्षित बनाए रखा गया, वहां रोटेशन पॉलिसी के आधार पर नया आरक्षण लागू हो सकता है।

बदलेगा चुनावी गणित

प्रदेश में पहली बार ट्रिपल टेस्ट के आधार पर ओबीसी आरक्षण दिया जाएगा। सूत्रों का दावा है कि इससे बड़े पैमाने पर सीटों का आरक्षण बदल जाएगा। अगर ऐसा होता है तो राजनीतिक दलों को नए सिरे से चुनावी गोटियां बिछानी होंगी। कई सूरमाओं की उम्मीदों पर पानी फिर सकता है। इसके पहले प्रदेश सरकार द्वारा जारी किए गए प्रस्तावित आरक्षण से जिन्हें मायूसी मिली थी, उनके चेहरे भी खिल सकते हैं। राजनीतिक दलों को भी अब नए सिरे से रणनीति तैयार करनी होगी।

760 सीटों पर घोषित हुए थे चुनाव

5 दिसंबर, 2022 को जब नगर विकास विभाग ने प्रस्तावित आरक्षण जारी किया था, तब 760 शहरी निकायों में चुनाव घोषित किए थे। शहरी निकायों की कुल संख्या 762 है, जबकि महराजगंज की सिसवा नगर पालिका परिषद और बस्ती की भानपुर नगर पंचायत में तकनीकी वजहों से चुनाव नहीं घोषित किए गए थे। 2017 में जब चुनाव हुए थे तब 653 शहरी निकाय थे और चुनाव 652 में हुए थे।

तय समय के भीतर दी रिपोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने भले आयोग को 31 मार्च तक रिपोर्ट देने के लिए कहा था, लेकिन आयोग ने दो महीने दस दिन के भीतर तय समय सीमा के पहले ही रिपोर्ट दे दी है। अगर सुप्रीम कोर्ट रिपोर्ट को स्वीकार करके चुनाव करवाने की अनुमति दे देता है तो ट्रिपल टेस्ट के आधार पर चुनाव करवाने वाला यूपी तीसरा राज्य होगा। इसके पहले केवल मध्य प्रदेश में ही यह संभव हो सका है। महाराष्ट्र में चुनाव अबतक फंसे हैं। झारखंड के शहरी निकाय के चुनाव नहीं हो सके हैं। बेंगलुरु नगर महापालिका का चुनाव फंसा है। ओडीशा को तो बिना ओबीसी आरक्षण दिए ही चुनाव करवाने पड़े थे। बिहार में शहरी निकायों के चुनाव हो तो चुके हैं, लेकिन इसकी वैधता सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अधीन है।

यूपी में नगर निकाय, एक नजर में

  • 762 शहरी निकाय हैं कुल प्रदेश में
  • 17 नगर निगम हैं
  • 200 नगर पालिका परिषद हैं
  • 544 नगर पंचायत हैं
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