Monday, February 26, 2024
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UP सरकार की नई क़वायद, नगर पालिकाओं के लिए शुरू करेगी चीफ़ मिनिस्टर फ़ेलोशिप योजना

संवाददाता

लखनउ। उत्तर प्रदेश सरकार ने नगर निकायों के समुचित विकास के लिए कदम उठाने का फैसला किया है। अधिकारियों की माने तो सीडीओ की देखरेख में ये शोधार्थी काम करेंगे और काम की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के अलावा योजनाओं के कार्यान्वयन में तेजी लाएंगे। सीएम योगी की मंशा के अनुरूप राज्य के विकास में प्रतिभाशाली युवाओं को शामिल करने के प्रयास में अब 100 महत्वाकांक्षी नगर निकायों में मुख्यमंत्री फेलोशिप योजना शुरू करने जा रही है।

100 शोधार्थियों को तैनाती का प्रस्ताव

राज्य सरकार एक वर्ष के लिए 100 शोधर्थियों का चयन करने और उन्हें कुछ पारिश्रमिक, यात्रा भत्ता, साथ ही काम करने के लिए टैबलेट देने का प्रस्ताव रखा है। ये शोधार्थी आकांक्षी नगर निकायों के विकास के लिए जिलाधिकारी और मुख्य विकास अधिकारी की देखरेख में काम करेंगे और काम की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के अलावा योजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी लाएंगे।

योगी सरकार जल्द जारी करेगी शासनादेश सरकार की ओर से बताया गया है कि सरकार की मंजूरी से असाधारण उम्मीदवारों के लिए फेलोशिप की अवधि बढ़ाई जा सकती है। कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं को राज्य सरकार के साथ नीति निर्माण, प्रबंधन, कार्यान्वयन और योजनाओं की निगरानी में भागीदारी के लिए एक विशेष अवसर प्रदान करना है। राज्य योजना विभाग जल्द ही इस संबंध में शासनादेश जारी कर सकता है।

100 आकांक्षी ब्लाकों के लिए फेलोशिप योजना

यूपी सरकार ने 100 आकांक्षी ब्लॉकों में सीएम फेलोशिप योजना लागू की है। इसने विभिन्न विकास प्राधिकरणों में काम करने और निवेशकों के साथ समन्वय करने के लिए युवाओं की नियुक्ति के लिए ‘उद्यमियों के मित्र’ (उद्यमी मित्र) योजना भी शुरू की है।

युवाओं को तकनीक से जोड़ने की सरकार की मंशा

सीएम योगी आदित्यनाथ की मंशा है कि युवाओं की ऊर्जा, तकनीकी कौशल और नई सोच का लाभ महत्वाकांक्षी नगरीय निकायों को भी मिले।चयनित शोधार्थियों को कार्यक्रम की अवधि में नगर निकाय में ही आवास उपलब्ध कराया जायेगा। साथ ही सरकार ऐसे शोधार्थियों को वरीयता देगी जो दो-तीन वर्ष का अनुभव प्राप्त कर सरकारी सेवा में आना चाहते हैं।

इन क्षेत्रों के युवाओं को मिलेगा मौका

इनका चयन बैंकिंग, वित्त, राजस्व, सार्वजनिक नीति और शासन, पर्यटन और संस्कृति, डेटा विज्ञान, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, आईटी, आईटीईएस, जैव प्रौद्योगिकी, मशीन लर्निंग, डेटा प्रशासन, कृषि, ग्रामीण विकास, पंचायती राज और जैसे क्षेत्रों में किया जाएगा। इसके अलावा वन, पर्यावरण और जलवायु शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वच्छता, पोषण और कौशल विकास से जुड़े शोधार्थियों को भी रखा जाएगा।

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