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व्‍यवसायिक वाहन तो बेतहाशा बढ़े पर दिल्‍ली नगर निगम का टोल टैक्‍स नहीं बढा

संवाददाता

नई दिल्ली । राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली होने की वजह से पड़ोसी राज्यों से लोग बड़ी संख्या में आते हैं जबकि विदेशों से आने वाले पर्यटक भी पड़ोसी राज्यों में टैक्सी आदि से घूमने जाते हैं, इसके बावजूद भी निगम की टोल से आय में उतनी तेजी से बढ़ोतरी नहीं हो रही जितनी तेजी से राजधानी और दिल्ली एनसीआर में वाहनों की संख्या बढ़ रही है। दिल्ली में बात करें तो 2021-22 में 4, 46819 वाहन हुए पंजीकृत हुए थे, जिसकी तुलना में वर्ष 2022-23 में 6,34686 वाहन हुए पंजीकृत हुए।

इन चार पहिया वाहनों में निजी वाहनों के साथ व्यावसायिक वाहनों की संख्या के पंजीकरण में भी बढ़ोतरी हुई और यह बढ़ोतरी हर वर्ष हो रही है। बस कोरोना के दो वर्षों को छोड़ दें तो हर वर्ष वाहनों का पंजीकरण बढ़ रहा है। ओला उबर की टैक्सी का प्रचलन बढ़ने से भी व्यावसायिक वाहनों का दिल्ली में प्रवेश बढ़ा है। ऐसे में विशेषज्ञों का कहना है कि टोल से आने वाला राजस्व भी बढ़ना चाहिए।

दिल्ली नगर निगम को मिले सवा लाख डिफाल्टर

दिल्ली नगर निगम को चूना लगाने वाले सवा लाख डिफाल्टरों का पता लगा है। हालांकि निगम ने वित्त वर्ष 2022-23 में इनसे 44 करोड़ रुपये का बकाया संपत्तिकर वसूल किया है। इन संपत्तिकर दाताओं ने दस वर्ष से अधिक से संपत्तिकर जमा नहीं किया था। इसको देखते हुए निगम ने समृद्धि योजना की शुरुआत की थी।

अक्टूबर में शुरू की गई इस योजना के तहत रिहायशी संपत्ति में छह साल का बकाया संपत्तिकर जमा करने पर 14 साल का बकाया माफ कर दिया है। इसी प्रकार व्यावसायिक संपत्तिकर दाताओं से सात साल का संपत्तिकर लेकर 13 साल का जुर्माना माफ कर दिया है। निगम ने 2004 में वैल्यू एरिया मेथड लागू किया।

ऐसे में जो कोई संपत्तिकर जमा नहीं करता है उससे 2004 से बकाया ब्याज और जुर्माने के साथ लिया

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