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केजरीवाल-सिसोदिया की लापरवाही के चलते दसवीं के नतीजे में दिल्ली 13वें स्थान पर लुढ़की: सचदेवा

नई दिल्ली। दिल्ली भाजपा के अध्यक्ष श्री वीरेन्द्र सचदेवा ने कहा है कि बोर्ड परीक्षाओं में दिल्ली सरकार के स्कूलों का गिरना दर्शाता है कि गत 8 वर्षों में दिल्ली के सरकारी स्कूलों में शिक्षा सुधार के अरविंद केजरीवाल सरकार के दावे कितने खोखले है। उन्होंने कहा है कि कोविड ने पूरे देश की शिक्षा व्यवस्था को प्रभावित किया पर जहाँ चेन्नई, त्रिवेन्द्रम एवं बेंगलूरू ने एक्स्ट्रा क्लासेज लगा कर शिक्षा स्तर बरकरार रखा तो वहीं केजरीवाल -सिसोदिया की लापरवाही के चलते दसवीं के नतीजे में दिल्ली देश के शहरो में 13वें स्थान पर लुढ़क गई है। वीरेन्द्र सचदेवा ने कहा है कि गत वर्षों में मुख्य मंत्री अरविंद केजरीवाल, पूर्व शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया एवं वर्तमान शिक्षा मंत्री सुश्री आतिशी ने सरकारी स्कूलों के शिक्षा ढांचे को बेहतर बनाने की जगह स्कूलों को ईवेंट आयोजन स्थल एवं स्कूल मैनेजमेंट को राजनीतिक आखाड़ा बना दिया जिसके चलते बोर्ड परिक्षा नतीजा खासकर दसवीं का बुरी तरह गिरा है। सचदेवा ने कहा है कि 2020 से 2022 के बीच कोविड के चलते शैक्षणिक व्यवस्था प्रभावित हुई, ऑनलाइन पढ़ाई हुई एवं बिना परीक्षा प्रमोशन के चलते शिक्षा स्तर गिरा।
इस वर्ष जो छात्र बारहवीं एवं दसवीं की परीक्षा में बैठे उन्हें एक्स्ट्रा कलासेज की जरूरत थी पर केजरीवाल सरकार का ध्यान स्कूलों में मेंटोर प्रोग्राम, हैपीनैस क्लासेज जैसे ईवेंट कराने के साथ ही स्कूलों का अनुशासन बिगाड़ते हुए राजनीतिक रूप से प्रायोजित स्कूल मैनेजमेंट कमेटी बनाने पर था और उसी का परिणाम आज सबके सामने आया है। इसी तरह दिल्ली सरकार के स्कूलों में टीचर्स की कमी के कारण टीचर्स-छात्र अनुपात में बहुत अंतर होने के कारण भी टीचर छात्रों पर आवशयक ध्यान नही दे पाते हैं। सरकारी स्कूलों की टीचर्स एसोसिएशन लगातार यह बिंदु उठाती रही है। दिल्ली भाजपा अध्यक्ष ने कहा है कि हम रात दिन केजरीवाल, सिसोदिया एवं सुश्री आतिशी को दावे करते सुनते हैं कि दिल्ली के सरकारी स्कूल इतने अच्छे हैं कि अब लोग प्राइवेट स्कूल से अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में भर्ती करवा रहे हैं पर इन दावों को भी इस वर्ष के नतीजों ने नकार दिया है और प्राइवेट स्कूलों के परिणाम सरकारी स्कूलों से कहीं बेहतर आये हैं। इसी तरह हमें केजरीवाल सरकार के शिक्षा सुधार के दावों का खोखलापन इससे भी स्पष्ट है कि 2011 से 2014 में दसवीं का औसत नतीजा 99 प्रतिशत था जबकि केजरीवाल सरकार के 2015 से 2020 के कार्यकाल में यह गिर कर 80 प्रतिशत के आसपास रह गया है और अब 2023 मे भी यह 85 प्रतिशत ही है। सचदेवा ने कहा होगा कि बेहतर होगा शिक्षा मंत्री आतिशी अपनी पार्टी की प्रवक्ता बने रहने की जगह स्कूलों में शैक्षणिक स्तर सुधार, टीचर्स एवं छात्र अनुपात सुधारने पर ध्यान के साथ ही तुरंत स्कूल मैनेजमेंट समिति भंग करके स्कूलों की अनुशासन व्यवस्था वापस स्कूल प्रिंसिपलों को सौंपें।

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