Wednesday, February 21, 2024
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दिल्ली सरकार ने एलजी को सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट कमेटी का चेयरमैन बनाने के एनजीटी के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में दी चुनौती

नई दिल्ली। दिल्ली सरकार ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) द्वारा उपराज्यपाल को सॉलिड बेस्ट मैनेजमेंट पर बनी उच्च स्तरीय कमेटी का चेयरमैन बनाए जाने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर कर उसके फैसले को चुनौती दी है। याचिका में दिल्ली सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से एनजीटी के 16 फरवरी 2023 के आदेश को रद्द करने की अपील की है। दिल्ली सरकार ने याचिका में कहा है कि एनजीटी का यह आदेश दिल्ली में शासन की संवैधानिक व्यवस्था के साथ-साथ सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ के 2018 और 2023 के आदेशों का भी उल्लंघन करता है। अपने आदेश के माध्यम से एनजीटी ने सॉलिड बेस्ट मैनेजमेंट के मुद्दे को हल करने के लिए दिल्ली में विभिन्न प्राधिकरणों को शामिल करते हुए एक कमेटी बनाई है और दिल्ली के औपचारिक प्रमुख एलजी को उसका चेयरमैन बनाया है।

इस समिति में दिल्ली के मुख्य सचिव, दिल्ली सरकार के सिंचाई, वन एवं पर्यावरण, कृषि और वित्त विभागों के सचिव, दिल्ली जल बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी, डीडीए के उपाध्यक्ष, कंेद्रीय कृषि मंत्रालय से एक प्रतिनिधि शामिल हैं। इसके अलावा, समिति में पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (एमओईएफ और सीसी) से वन महानिदेशक या उनके द्वारा नामांकित व्यक्ति, जल शक्ति मंत्रालय या (एमओईएफ और सीसी) से एक प्रतिनिधी, राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (एनएमसीजी) के महानिदेशक और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के अध्यक्ष भी शामिल हैं।

दिल्ली सरकार ने अपनी याचिका में सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट की समस्याओं को दूर करने और इसके उपचारात्मक उपायों को अपनाने के लिए विभिन्न विभागों के बीच समन्वय की आवश्यकता को स्वीकार किया है। मगर दिल्ली सरकार ने एनजीटी के आदेश के जरिए एलजी को दी गई कार्यकारी शक्तियों पर कड़ी आपत्ति भी जताई है। क्योंकि यह शक्तियां देना विशेष रूप से दिल्ली की चुनी हुई सरकार की क्षमता के तहत आने वाले क्षेत्रों पर अतिक्रमण है। दिल्ली सरकार की याचिका में लिखा है कि एनजीटी ने उपराज्यपाल को कमेटी का चेयरमैन नियुक्त किया है, जबकि ऐसी कमेटी की अध्यक्षता करने के लिए उपराज्यपाल को कोई भी वैधानिक या संवैधानिक शक्ति नहीं दी गई थी।

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