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जयुपर की गोविन्द गुरु जनजातीय विश्वविद्यालय बांसवाडा का पंचम दीक्षान्त समारोह सम्पन्न

जयपुर। गोविन्द गुरु जनजातीय विश्वविद्यालय बांसवाडा का पंचम दीक्षान्त समारोह शुक्रवार को राज्यपाल राजस्थान एवं कुलाधिपति गोविन्द गुरु जनजातीय विश्वविद्यालय के श्री कलराज मिश्र के मुख्य आतिथ्य एवं गोविन्द गुरु जनजातीय विश्वविद्यालय बांसवाड़ा के कुलपति श्री प्रो केशवसिंह ठाकुर की अध्यक्षता में जीजीयूटी के मुख्य परिसर के माही भवन में भव्य आयोजन किया गया। विश्वविद्यालय अपनी स्थापना के बाद से प्रतिवर्ष ही दीक्षांत समारोह आयोजित करता आया है इसी कड़ी में पंचम दीक्षांत समारोह में शैक्षणिक सत्र 22-23 में विभिन्न कक्षाओं में सर्वोच्य स्थान पर रहे तीस विद्यार्थियों को गोल्ड मेडल उपाधि एवं मेरिट प्रमाण पत्र और ग्यारह शोधार्थियों को विद्या-वाचस्पति पीएचडी उपाधि मुख्य अतिथि महामहिम राज्यपाल एवं कुलाधिपति महोदय द्वारा प्रदान किए गए। पंचम दीक्षान्त समारोह में सम्बोधित करते हुए राज्यपाल श्री कलराज मिश्र ने गोल्ड मेडल उपाधि एवं शोधार्थियों को बधाई -शुभकामनाए देते हुए कहा कि विकसित भारत की परिकल्पना को साकार स्वरुप देने के लिए अपनी महत्ती भूमिका निभाएं। श्री मिश्र ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति युवाओं के भविष्य के लिए मददगार साबित होगी। उन्होंने कहा कि छात्राओं को शिक्षा के क्षेत्र में बढना एक सुखद अवसर है। उन्होंने कहा कि देश में नारी के सशक्तिकरण में अनेकों कार्य किये जा रहे है। उन्होंने कहा कि परिवार में एक नारी शिक्षित होती है वहा का सकारात्मक परिणाम मिलते है। उन्होंने आदीवासी समाज के युग पुरुष श्री गोविन्द गुरु को नमन करते हुए उनके बलिदानों को बताया और कहा कि उनके द्वारा जनजाति समाज की आध्यात्मिक, परम्पराओं विशिष्ठ संस्कृति और श्रेष्ठ जीवन मूल्यों के लिए दिये गये योगदान को जनजातीय क्षेत्र में शोध और अनुसंधान कार्यो को आगे बढाया जाए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने विकसित भारत- 2047 की जो संकल्पना संजोई है, उसके मूल में कर्णघार आज के युवा पीढी ही है आज का युवा शिक्षा अर्जित करने के साथ- साथ राष्ट्र विकास से जुडे तमाम विषयों पर भी गहन रुचि रखते हुए कार्य करे। उन्होंने आदिवासी क्षेत्रों का प्रभावी विकास के लिए स्वास्थ्य, शिक्षा और कौशल विकास के लिए सुनियोजित कार्य करने पर जोर दिया इसके लिए विश्वविद्यालय अपनी अहम् भूमिका का निर्वाहन करे।

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