Sunday, February 25, 2024
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स्मॉग टावर से प्रदूषण से तो राहत मिली नहीं, लूट लिया दिल्ली के खजाने को: बिधूड़ी

नई दिल्ली। दिल्ली विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष रामवीर सिंह बिधूड़ी ने कहा है कि केजरीवाल सरकार राजधानी में प्रदूषण पर नियंत्रण में तो पूरी तरह नाकाम रही ही है, इसकी आड़ में सरकारी खजाने पर करोड़ों रुपए का डाका डाला है। यह राशि मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और उनके मंत्रिमंडल के साथियों से वसूल की जानी चाहिए। वेतन न मिलने के कारण अब यह स्मॉग टावर कर्मचारियों ने ही बंद कर दिया है।बिधूड़ी ने कहा कि दिल्ली में पिछले ढाई महीने में एक भी दिन दिल्ली को स्वच्छ हवा नहीं मिल पाई। दिल्ली सरकार प्रदूषण से निपटने के कितने इंतजाम कर पाई, उसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि करोड़ों की लागत से कनॉट प्लेस में बना स्मॉग टावर लगातार दूसरी बार बंद हो गया है। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने इस स्मॉग टॉवर का उद्घाटन 2021 में बड़े जोर-शोर से किया था और 23 करोड़ की लागत से बने इस स्मॉग टावर के विज्ञापन पर भी करोड़ों रुपए खर्च किए गए थे। अब हालत यह है कि इसके कर्मचारियों ने खुद ही इस टावर पर ताला लगा दिया है। पिछले साल अप्रैल में भी यह बंद कर दिया गया था और सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद दिल्ली सरकार ने इसे फिर से चालू किया था लेकिन अब दिसंबर का वेतन न दिए जाने के कारण कर्मचारियों ने काम करने से इनकार कर दिया और टावर बंद कर दिया। बिधूड़ी ने कहा कि दिल्ली सरकार केवल प्रचार के लिए इस तरह की हवाई योजनाएं बनाती है और उसमें नियमों-कायदों का भी पालन नहीं किया जाता। यह टावर भी बिना अनुमति या अनुशंसा के चालू कर दिया गया। यहां तक दिल्ली सरकार की प्रदूषण समिति ने भी कभी इसकी सिफारिश नहीं की बल्कि इसकी सफलता पर भी आशंका ही जाहिर की। इस बारे में आईआईटी मुंबई की जो रिपोर्ट आई है, उसका नतीजा यही है कि यह 20 मीटर से ज्यादा क्षेत्र में प्रभावी नहीं है। हैरानी की बात यह है कि दिल्ली सरकार ने कोई स्टडी कराए बिना ही इस टावर पर इतनी बड़ी राशि खर्च कर डाली। इस बात की जांच की जानी चाहिए कि जिस कंपनी को स्मॉग टावर चलाने का ठेका दिया गया, वह आम आदमी पार्टी के किस नेता से संबद्ध है। इस टावर को चलाने पर एक साल का खर्च करीब दो करोड़ रुपए आता है और एक करोड़ रुपए की बिजली खर्च हो जाती है। इतनी बड़ी राशि खर्च करने के बाद भी नतीजा शून्य है। उन्होंने कहा कि एक तरफ तो दिल्ली सरकार राजधानी में मजदूरों की हितैषी बनती है लेकिन उसकी योजनाओं में काम करने वाले कर्मचारियों को न्यूनतम वेतन देना तो दूर, वेतन दिया ही नहीं जाता। यहां के स्टाफ की शिकायत है कि उन्हें पीने का पानी और सुलभ शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाएं तक नहीं दी गई थीं। उनके पास बुनियादी उपकरण और सुरक्षा गियर भी नहीं थे। इतने कम समय में ही टावर खराब भी हो चुका है और अब अपनी पूरी क्षमता से काम भी नहीं कर रहा। टावर में लगे 5000 फिल्टर्स में से अधिकांश बेकार हो चुके हैं। दिल्ली के खजाने पर बिना वजह इतना बोझ डालने का सारा जिम्मा केजरीवाल सरकार पर है और यह राशि केजरीवाल और उनके साथी मंत्रियों से वसूल की जानी चाहिए।

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