Sunday, February 25, 2024
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दिल्ली विधानसभा को किया जाए भंग: बिधूड़ी

नई दिल्ली। दिल्ली विधानसभा में भाजपा विधायक दल ने क्षोभ व्यक्त किया है कि 15 फरवरी से आरंभ होने वाले बजट सत्र में भी मनमाने ढंग से प्रश्नोत्तर काल हटा दिया गया है। पिछले विधानसभा सत्रों में भी सदस्यों को प्रश्न पूछने के संवैधानिक अधिकार से लगातार वंचित रखा गया है। केजरीवाल सरकार विधानसभा को तानाशाहीपूर्ण और अलोकतांत्रिक तरीके से चला रही है। नेता विपक्ष रामवीर सिंह बिधूड़ी ने कहा है कि इस स्थिति को देखते हुए हम राष्ट्रपति से भेंट करके विधानसभा भंग करने की मांग करेंगे क्योंकि विधानसभा का औचित्य ही खत्म हो गया है और अस्तित्व खतरे में पड़ गया है। संवाददाता सम्मेलन में बिधूड़ी के साथ भाजपा विधायक सर्वश्री विजेंद्र गुप्ता, जितेंद्र महाजन, अनिल वाजपेयी, अभय वर्मा और अजय महावर भी मौजूद रहे। विधानसभा सत्र से पहले बिधूड़ी की अध्यक्षता में भाजपा विधायक दल की बैठक हुई जिसमें यह प्रस्ताव पारित किया गया कि केजरीवाल सरकार के असंवैधानिक और अलोकतांत्रिक रवैये को देखते हुए अब इस सरकार से कोई अपेक्षा नहीं की जा सकती। यह सरकार न तो विधानसभा के प्रति जवाबदेह है, न विपक्ष के प्रति और न ही जनता के प्रति। सरकार ने विधानसभा में विपक्ष के साथ-साथ सत्ता पक्ष के सदस्यों से प्रश्न पूछने तक का संवैधानिक अधिकार छीन लिया है। विधानसभा में सदस्य सरकार की नीतियों या कार्यों पर कोई सवाल नहीं उठा सकते और न ही अपने क्षेत्र की जनता की आवाज को उठा सकते हैं। विपक्षी सदस्यों के साथ लगातार सौतेला व्यवहार किया जा रहा है। यदि वे कोई भी मुद्दा उठाने की कोशिश करते हैं तो उन्हें विधानसभा से बाहर करा दिया जाता है। यहां तक कि नियमानुसार स्वीकार किए प्रस्तावों को भी उठाने की अनुमति नहीं दी जाती। विधानसभा में दिल्ली के मामलों पर ही चर्चा नहीं की जाती और ऐसे विषयों पर चर्चा की जाती है जो दिल्ली सरकार के अधिकार क्षेत्र में ही नहीं आते। प्रधानमंत्री, उपराज्यपाल और अन्य उच्च संवैधानिक पदों पर बैठे व्यक्तियों के प्रति असम्मान व्यक्त किया जाता है। ऐसी स्थिति में अब राष्ट्रपति से हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया जाएगा और उनसे कहा जाएगा कि विधानसभा को भंग कर दिया जाए।

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